SHAHENSHAH KI QALAM SE! शहंशाह की क़लम से!

सच बात-हक़ के साथ! SACH BAAT-HAQ KE SAATH!

43 Posts

41 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12543 postid : 1226387

ईरोम शर्मीला तुम्हारे जज़्बे को मेरा सलाम।

Posted On: 10 Aug, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मणिपुर एक्टिविस्ट आईरन लेडी ईरोम शर्मीला का अनशन समाप्त| दिनांक : ०९.०८.२०१६.

ईरोम शर्मीला ने 16 साल के लम्बे संघर्ष (अन्न त्याग) के बाद आज अनशन समाप्त किया| समझ में नहीं आरहा खुश हूँ या समाज और सरकार की बेहिसी पर शर्मिंदा?

नए इरादों के साथ ईरोम शर्मीला का संघर्ष सराहनीय है , लेकिन दुःख की बात है संचार तकनीक के तमाम उच्च स्तरीय संसाधनों के जमाने में भी उनकी आवाज को पूरा देश और सत्ता सिंहासन नहीं सुन पा रहा है, या सुनना नहीं चाहता है| ईरोम आज भी कह रही है :-

कई वर्षों का लंबा सफ़र,
पर आग अभी जल रही है!

धधक रही है ज़ुल्म के ख़िलाफ़,
परिवर्तन के लिए!!

इससे पहले की मेरी आवाज़ ख़त्म हो,
दो मुझे अंधियारे का उजाला !!!

प्रिय ईरोम, बापू, जो तुम्हारे आदर्श हैं, मेरे आदर्श हैं, देश और विश्व के एक विशाल समुदाय के भी आदर्श हैं। हमारे देश का ही एक एहसान फ़रामोश तबक़ा उन्हें आज खलनायक और उनके हत्यारे और आज़ाद देश के प्रथम आतंकवादी नाथूराम गोडसे को नायक बनाने पर उतारू है। सत्ता, शासन और प्रशासन मूक दर्शक है।

ऐसे माहौल में तुम्हारे आंसूओं और जज़्बातों को समझना हर किसी के बूते की बात नहीं। काश अहिंसा और लोक तंत्र में तुम्हारे विश्वास को देश की सरकार, राजनैतिक दल और जनता समझ सकें और सम्मान कर सकें।

तुम होगी कामयाब एक दिन, इसी विश्वास के साथ,

ईरोम शर्मीला तुम्हारे जज़्बे को मेरा सलाम।

(सैयद शहनशाह हैदर आब्दी)
समाजवादी चिंतकirom-sharmila_031416091826

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
August 23, 2016

ईरोम शर्मिला की माँग चाहे न मानी जाए लेकिन उसके दर्द को समझा जाना चाहिए और उसके जज़्बे को यकीनन सलाम किया जाना चाहिए । मुल्क की दूसरी बेटियों की तरह वह भी मुल्क की बेटी है । उसका दर्द मुल्क के सारे बाशिंदों को साझा करना चाहिए । अपने उसूल पर अडिग रहकर सोलह साल तक अनशन करना मामूली बात नहीं है । उसका यह संघर्ष बापू के सत्याग्रह जैसा ही रहा है और यह संघर्ष अभी जारी है ।


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran