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जश्ने आज़ादी मुबारक । جشن آزادی مبارک ! HAPPY INDEPENDENCE DAY.

Posted On: 15 Aug, 2016 में

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जश्ने आज़ादी मुबारक । جشن آزادی مبارک ! HAPPY INDEPENDENCE DAY.

जश्न-ए-आज़ादी की 70वीं सालगिरह मुबारक!

ऐ, अर्ज़े वतन तुझे सलाम !!

मादरे वतन, तू सलामत रहे। आमीन।

ख़ुश क़िस्मत हैं हम, कि उस अज़ीम सरज़मीन पर पैदा हुऐ जिसे हिन्दुस्तान कहते हैं। जहां कई मज़हब हैं, कई तहज़ीबें हैं, कई ज़ुबानें हैं, कई फिरक़े हैं, अलग-2 पहनावे हैं, अलग-2 पकवान हैं, अलग-2 खाने के तरीक़ें हैं, बहुत सी बातें, बहुत से तरीक़े, बहुत से रीति रवाज अलग हैं-लेकिन हम एक हैं, क्योंकि हम हिन्दुस्तानी हैं।हम भारतीय हैं।

यह सिर्फ हमारे मुल्क की ख़ासियत है कि हम ईद, दीपावली, क्रिसमस, महावीर जयंती, गुरु नानक जयंती, होली, मोहर्रम, जैसे त्योहार एक ही दिन पूरी आज़ादी और हर्षोल्लास के साथ मिल जुलकर मना सकते हैं।रब्बा तेरा शूक्र।

बदक़िस्मत हैं वो लोग जिन्हें अपनी मां की सलामती की दुआ मांगते हुए शर्म आती है, जबकि शरीयत, मुल्क और वतन से मोहब्बत को आधे ईमान का दर्जा दे रही है।

मादरे वतन, तू सलामत रहे। आमीन।

मुल्क के ग़द्दार हैं वो लोग जो इस मुल्क के तिरंगे परचम को एक रंग में रंगने की साज़िश रच रहे हैं। धर्म निरपेक्षता और समाजवाद जैसे संवैधानिक प्रावधानों का न सिर्फ़ मज़ाक़ उङा रहे हैं बल्कि इन्हें बेशर्मी से नकार रहे हैं।

फिरक़ावाराना फसाद और बारूदी धमाकों के ज़रिये दहशत और नफरत फैला कर मुल्क के सबसे बड़े वफादार होने का ढिंढोरा पीट रहे हैं। बेईमानी और धोखे के ज़रिये ग़रीबों और मुल्क की मिल्कियत को कौड़ियों के दाम सरमायादारों को बेच कर, पूंजीवादी राजनीतिक व्यवस्था लाना चाहते हैं।

हमें इन सब ग़द्दारों, बेईमानों, मक्कारों, बहरूपियों, छद्म राष्ट्र वादियों और बुज़दिलों से अपने अज़ीम मुल्क की हिफाज़त करनी है, इसकी गंगा जमुनी तहज़ीब की हिफाज़त करनी है, यह सोच कर कि,

“हम तो मिट जायेंगे, ऐ अर्ज़े वतन तुझ को,
ज़िन्दा रहना है क़यामत की सहर होने तक !”

आज़ादी के लिये अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाले जांबाज़ों को इस अज़्म के साथ सलाम कि हम आपकी विरासत की हिफाज़त करेंगें और तिरंगे को एक रंगा करने की हर साज़िश को नेस्तोनाबूद कर देंगे।

जश्न-ए-आज़ादी तहेदिल से मुबारक!!!

हिन्दुस्तान ज़िन्दाबाद! ज़िन्दाबाद!! ज़िन्दाबाद!!!

हिन्दुस्तान पाइन्दाबाद! पाइन्दाबाद!! पाइन्दाबाद!!!

(सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी)
समाजवादी चिंतक
उप अभियंता (बाह्यअभियांत्रिकी सेवाऐं)
भेल-झांसी (उ0प्र0), पिन-284129. मो.न.0941594354..

JASHNE AAZADI MUBARAK

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
August 19, 2016

आदरणीय सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी जी ! सादर अभिनन्दन ! आपके कुछ लेख पढ़े ! अच्छा लिखते हैं, लेकिन निष्पक्ष होकर नहीं ! देश के आम मुसलमानों से थोड़ा अलग हटकर सोचते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं ! मोदी विरोध से आप भी ग्रसित है ! देश की जनता द्वारा बहुमत से चुने हुए प्रधानमंत्री का हमेशा विरोध करना किसी देशद्रोह से कम नहीं है ! जब भी आप ऐसा करते हैं, तब आपकी अच्छी बातें भी निरर्थक साबित हो जाती हैं ! लेख में आपने लिखा है कि ‘मुल्क के ग़द्दार हैं वो लोग जो इस मुल्क के तिरंगे परचम को एक रंग में रंगने की साज़िश रच रहे हैं !’ यहाँ पर पूरी बात लिखने से क्यों बच रहे हैं? मकसद केवल मोदी, भाजपा और संघ का विरोध करना मात्र था ! आपको निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए था कि मुल्क के गद्दार हैं वो लोग जो इस मुल्क का भगवाकरण या इस्लामीकरण करना चाहते हैं ! इस तरह से एकपक्षीय लिखेंगे तो समाजवादी पार्टी का प्रचार लगेगा ! सादर आभार !

Ashish Kumar Trivedi के द्वारा
August 16, 2016

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा

    SYED SHAHENSHAH HAIDER ABIDI के द्वारा
    August 18, 2016

    हम, जंगे आज़ादी जब जीते तब ऊधमसिंह जी, राम मोहम्मद आज़ाद बने, जब अशफाक़उल्ला और राम प्रसाद बिस्मिल एक दूसरे के भाई बने। रानी झांसी, ग़ुलाम ग़ौस खान और ख़ुदा बख़्श ने एक दूसरे पर अटूट विश्वास किया। ऐसे अनेकानेक उदाहरण दिये जा सकते हैं। देश को विश्व गुरु बनाने के लिए आज फिर इसी जज़्बे की बेहद ज़रूरत है। जो हममें एक दूसरे के प्रति नफरत और अविश्वास का बीज हो रहे हैं, देश के संविधान की आत्मा – समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र का मज़ाक़ उङा कर इन्हें नकार रहे हैं। वो न सिर्फ हमारे, बल्कि देश और समाज के दुश्मन हैं, राष्ट्र द्रोही हैं। ऐसे लोगों को सबक़ सिखाना ही आज़ादी के शहीदों को सच्ची श्रृध्दाजंली है। मां तुझे सलाम। जश्ने आज़ादी की 70 वीं साल गिरह अज़ीम देश के बाशिंदों को बहुत बहुत मुबारक।“

Jitendra Mathur के द्वारा
August 15, 2016

योम-ए-आज़ादी आपको भी मुबारक । तीन रंगों में रंगे मुल्क के नक़्शे का बहुत ही सुंदर डिज़ाइन बनाया गया है आपके यहाँ । मैं भी आप ही की तरह भेल का कामगार हूँ (हैदराबाद में) । हमारा संगठन कई रंगों से रंगे इंद्रधनुष जैसी भारतीय एकता का ही प्रतीक है । आपके जज़्बात को मेरा सलाम । वतन से बढ़कर कुछ नहीं । वतन सलामत है तो ही हम सलामत हैं ।

    SYED SHAHENSHAH HAIDER ABIDI के द्वारा
    August 18, 2016

    ’ ख़ुश क़िस्मत हैं हम, कि उस अज़ीम सरज़मीन पर पैदा हुऐ जिसे हिन्दुस्तान कहते हैं। जहां कई मज़हब हैं, कई तहज़ीबें हैं, कई ज़ुबानें हैं, कई फिरक़े हैं, अलग-2 पहनावे हैं, अलग-2 पकवान हैं, अलग-2 खाने के तरीक़ें हैं, बहुत सी बातें, बहुत से तरीक़े, बहुत से रीति रवाज अलग हैं-लेकिन हम एक हैं, क्योंकि हम हिन्दुस्तानी हैं।हम भारतीय हैं। यह सिर्फ हमारे मुल्क की ख़ासियत है कि हम ईद, दीपावली, क्रिसमस, महावीर जयंती, गुरु नानक जयंती, होली, मोहर्रम, जैसे त्योहार एक ही दिन पूरी आज़ादी और हर्षोल्लास के साथ मिल जुलकर मना सकते हैं।रब्बा तेरा शूक्र।“

amitshashwat के द्वारा
August 15, 2016

माननीय सय्यद साहिब , सार्थक विचारों की अभिव्यक्ति से आपने जश्न में चेतना भर दी है . बहुत धन्यवाद .

    SYED SHAHENSHAH HAIDER ABIDI के द्वारा
    August 18, 2016

    बदक़िस्मत हैं वो लोग जिन्हें अपनी मां की सलामती की दुआ मांगते हुए शर्म आती है, जबकि शरीयत, मुल्क और वतन से मोहब्बत को आधे ईमान का दर्जा दे रही है। मादरे वतन, तू सलामत रहे। आमीन। मुल्क के ग़द्दार हैं वो लोग जो इस मुल्क के तिरंगे परचम को एक रंग में रंगने की साज़िश रच रहे हैं। हमें इन सब ग़द्दारों, बेईमानों, मक्कारों, बहरूपियों, छद्म राष्ट्र वादियों और बुज़दिलों से अपने अज़ीम मुल्क की हिफाज़त करनी है, इसकी गंगा जमुनी तहज़ीब की हिफाज़त करनी है!”


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